VIDEO स्पेशल रिपोर्ट*📝 *आज भी याद है ” कोड रेड आई पी एस अंकल….”*! *आईपीएस सिकरवार की महिला सुरक्षा की दिशा में अब रंग ला रही है अनोखी पहल-आमजन के विश्वास पर खरी उतरी पुलिस की” कोड रेड “टीम…! बस एक कॉल ओर हाज़िर पुलिस….VIDEO देखिये….!* 👉 *तत्कालीन पुलिस कप्तान एम एस सिकरवार के अल्प कार्यकाल से अनवरत जारी पुलिस की एक शानदार मुहिम…!*

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👉 *तत्कालीन पुलिस कप्तान एम एस सिकरवार के अल्प कार्यकाल से अनवरत जारी पुलिस की एक शानदार मुहिम…!*
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*फोन – हेलो.., पुलिस कोड रेड….?*
* कोड रेड- हां जी…..! हम क्या मदद कर सकते है आपकी….?*
*फोन- जगह ….(फर्लांना-फ़र्लांना)…! plz help…?*
* कोड रेड – बस मेडम,सिर्फ पांच मिनट…!*
*ओर फिर….*
*ओर फिर पांच मिनट के अंतराल में ही फोनकर्ता की सहायतार्थ महिला व पुलिस की विशेष टीम का मौके पर पहुचना….*

*जी हाँ, यह किसी फिल्म या कहानी की पटकथा नही है बल्कि हक़ीक़त में ही पुलिस का वह परिवर्तित चेहरा है जो पिछले कई दिनों से जबलपुर में अक्सर देखा जा रहा है और प्रदेश में सुर्खियां बटोर रहा है…!*

जबलपुर तत्कालीन पुलिस कप्तान एम एस सिकरवार द्वारा बढ़ते महिला अपराधो को रोकने व पुलिस की बिगड़ती छवि को सुधारने के लिए ऐसा ही एक अभिनव प्रयोग अल्प कार्यकाल के दौरान किया गया था जो आज जबलपुर में तो लोगो का विश्वास जीत ही चुका है,साथ ही प्रदेश भर में सुर्खियां भी बटोर रहा है।

जबलपुर तत्कालीन पुलिस कप्तान एम एस सिकरवार ने बढ़ते महिला अपराधों ,छेड़छाड़ की घटनाओं को देखते हुए एक सशक्त पुलिस स्कॉट “कोड रेड” को खड़ा किया था जो किसी भी सूचना पर महज पांच मिनट में मौके पर पहुच जाती है। अल्प कार्यकाल के दौरान ही लागू की गई इस पहल की शहर में चारोओर सराहना हुई। उनकी सोच एक सभ्य समाज में अच्छे वातावरण का निर्माण था। मजनुओं में खलबली मचाती ये  कोड रेड टीम जबलपुर शहर के हर नुक्कड़ पर महिला बल के साथ मुस्तेद थी ओर जबलपुर की बेटियाँ अपना मस्तक ऊँचा कर निडर होकर अपने गतंबय पर जा सकती थी। इस पहल का सकारात्मक परिणाम यह सामने आया कि खुद बालिकाएं अथवा महिलाओं ने निडर होकर पुलिस को सूचनाएं देना प्रारम्भ कर दिया। यहाँ सूचनाकर्ता का नाम भी गुप्त रखा जाता था जिससे नारी शक्ति के मन मे विश्वास कायम हुआ।
यह अभियान इतना चर्चित हुआ कि शहर की लाखों बेटियाँ आज भी उन्हें रेडकोड Ips अंकल के नाम से पुकारती हे ।
किन्तु नोकरशाही का एक दुखद पहलू यह भी है कि अच्छे काम करने बाले ऑफ़िसर को तवज्जो कुछ कम ही दी जाती हे । सशक्त अधिकारी के रूप में पहचाने जाने वाले एम एस सिकरवार के लिए जहाँ हज़ारों माता पिता ओर लाखों बेटियों की नज़रों में अमिट सम्मान क़ायम हे वही ऐसे अधिकारी के ख़िलाफ़ हमेशा सत्ता के नशे में खोए दारू ओर अवैध रेत खनन का व्यवसाय करने बाले जनप्रतिनिधि उल जुलूल बातें कर अपनी योग्यता का भद्दा मज़ाक़ उड़बाँ चुके हे ।

हालांकि,महज़ आठ माह के अल्प कार्यकाल के बाद ही सत्ता में सेंध लगा चुके अवैध गोरखधंधों के कारोबारियों ने अपने मंसूबे पूरे न होने के कारण उनकी बदली के इंतजाम कर दिए मगर शहर वासियों के मन पर आज भी उनकी अमिट छाप छूट गयी है।
विचारणीय पहलू यह भी रहा कि एक शहर में प्रयोग के तौर पर की गई पुलिस की इस अभिनव पहल को सफल होने के बाद अन्य जिलो में क्यों लागू नहि किया गया । दबी जुबान में महकमे से जुड़े सूत्र यह बताते है कि एक प्रमोटी आई पी एस के द्वारा लागू की गई टीम के गठन से उसकी सफलता से डायरेक्ट आई पी एस का मान गिर जाता इसलिए प्रदेश के अन्य जिलों के लिए इसे हरीझंडी नही दी गयी।
ज़रूरत हे सिस्टम में जो ऑफ़िसर अच्छा काम करे उसकी महक आम आवाम की तरह सियासत के हर ज़र्रे में महकना चाहिए वर्ना मुख्यमंत्री की लताड़ के बाद पुलिस आनन फ़ानन में कान पकड़ाऊ कार्यवाही ही कर पाएगी ।साधुवाद हे उस कप्तान एम एस सिकरवार को जिनकी पहल के परिणाम दूरगामी थे ।एसे सशक्त अधिकारी के चंद कार्यालय को जबलपुर की जनता भुला नहि पाएगी ।

(तत्कालीन पुलिस अधीक्षक एम एस सिकरवार)