खास ख़बर ● न्यूयॉर्क टाइम्स ने छह महीने पहले खुलासा किया था-मारे जा चुके हैं अगवा भारतीय..!

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खास ख़बर

● न्यूयॉर्क टाइम्स ने छह महीने पहले खुलासा
किया था-मारे जा चुके हैं अगवा भारतीय..!

नई दिल्ली। इराक़ में चार साल पहले लापता हुए भारतीय बहुत पहले मारे जा चुके थे। अमरीकी अख़बार “न्यूयॉर्क टाइम्स” ने छः महीने पहले खोजी ख़बर छाप कर दावा किया था कि अगवा भारतीयों को आईएसआईएस ने मार दिया है।

आज विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने राज्यसभा में विधिवत इस बात की सूचना दी कि इराक़ में 39 भारतीयों की आतंकी संगठन तो आईएसआईएस ने हत्या कर दी है। इनमें से 38 के डीएनए परिजनों से मैच गए हैं। एक की पुष्टि होना बाक़ी है। इन भारतीयों को जून 2014 में आईएस ने अगवा किया था। तब से सरकार इनके लापता होने की बात कहती रही।

सरकार का कहना था कि जब तक कोई पुख्ता सबूत नहीं मिल जाता इनके ज़िंदा या मृत होने किसी भी बात की पुष्टि नहीं की जा सकती।
इस खुलासे के बाद अब यह दावा किया जा रहा है कि सरकार को छह महीने पहले ही पता लग चुका था कि सारे भारतीय मारे जा चुके हैं। इस बारे में अमरीकी अख़बार न्यूयॉर्क टाइम्स ने 9 अक्टूबर 2017 को ख़बर छापी थी।
अख़बार ने अपनी खोजी ख़बर को” Digging Up the Dead: Probing the ruins of mosul..”अर्थात ” गढ़े मुर्दे उखाड़ना: मोसुल की कब्रों की खोज़”
शीर्षक दिया था। अख़बार ने तमाम तस्वीरों के साथ दावा किया था कि मोसुल में अगवा भारतीय भी मारे जा चुके हैं।
इसी ख़बर के आधार पर तब एक भारतीय न्यूज़ चैनल ने भी ख़बर दिखाई थी कि 39 भारतीय अब ज़िंदा नहीं हैं।

विदेश सेवा में रह चुके और न्यूज़ चैनल 4tv के विदेश मामलों के संपादक प्रमोद पाहवा Parmod Pahwa कहते हैं कि ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ जैसे ज़िम्मेदार अख़बार की ख़बर पर अविश्वास करने का कोई कारण नहीं है। सरकार को उस ख़बर पर भरोसा करके अपनी सक्रियता बढ़ाना चाहिए थी।
पाहवा कहते हैं कि यदि बिना सबूतों के किसी को मृत घोषित नहीं किया जा सकता तो सरकार ने A32 के 29 वायुसैनिकों को कैसे मृत घोषित कर दिया..?

इसके अलावा पंजाब के कुछ परिवारों ने दावा किया है कि सरकार ने पिछले साल अक्टूबर में डीएनए सैम्पल लिए थे। एक अपहृत मनजिंदर की बहन गुरपिंदर ने एक समाचार एजेंसी को बताया कि डीएनए के लिये सैम्पल लेते वक्त भी साफ नहीं बताया गया था कि शवों से मिलान के लिए सैम्पल लिए जा रहे हैं।
आज सरकार के ऐलान के बाद भी परिजनों में भारी आक्रोश व्यापत है। मारे गए लोगों का कहना है कि सरकार ने उन्हें लंबे समय तक अंधेरे में रखा।