घर फूंक तमाशा मध्य प्रदेश का…..* * खेलो इंडिया से पता चला कथनी-करनी का अंतर

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घर फूंक तमाशा मध्य प्रदेश का
खेलो इंडिया से पता चला कथनी-करनी का अंतर
श्रीप्रकाश शुक्ला
ग्वालियर। पिछले 12 साल में मध्य प्रदेश ने खेलों में कितनी तरक्की की इस बात का पता आज देश की राजधानी दिल्ली में चल गया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और खेल मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौर की एक नेक पहल पर नौ दिन के खेलो इंडिया के तमाशे में मध्य प्रदेश को चार स्वर्ण, तीन रजत और छह कांस्य पदकों सहित कुल 13 पदक मिले। तालिका में मध्य प्रदेश 12वें स्थान पर रहा।
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और खेल मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया हर खेल मंच पर मध्य प्रदेश में खेलों की तरक्की का गुणगान करते नहीं अघाते। सोचने की बात है मध्य प्रदेश में पिछले एक दशक में प्रदेश पर शिवराज तो खेलों में यशोधरा का राज रहा है। खेलों के नाम पर अरबों रुपये पानी की तरह बहाए गये लेकिन नतीजा ढाक के तीन पात ही निकला है। देश और मध्य प्रदेश की खेलों में तुलनात्मक छवि कितनी अच्छी है, इस पर नजर डालें तो सौ साल में भारतीय खिलाड़ियों ने ओलम्पिक में जितने मैडल जीते उससे अधिक तो अकेले अमेरिकी तैराक माइकल फ्लेप्स के गले की शोभा बढ़ा रहे हैं। अब मध्य प्रदेश की बात करें तो खेलो इंडिया में मध्य प्रदेश के खिलाड़ियों ने जहां चार स्वर्ण पदक जीते वहीं कर्नाटक के तैराक श्रीहरि नटराज ने अकेले छह स्वर्ण और एक रजत पदक पर कब्जा जमाया। कर्नाटक के इस लड़के ने जय हिंद कॉलेज बेंगलुरू का प्रतिनिधित्वा किया। श्रीहरि को प्रतियोगिता में सर्वश्रेष्ठै पुरुष तैराक घोषित किया गया।
महान तैराक माइकल फ्लेप्स के मुरीद श्रीहरि का कहना है कि वह खुद अपना लक्ष्यल तय करना चाहते हैं और उनकी निगाहें इस वर्ष नवम्ब र में ब्यूैनस आयर्स में होने वाले यूथ ओलम्पिक और उसके बाद 2020 के टोक्यो ओलम्पिक पर टिकी हुई हैं। उनका दीर्घकालिक लक्ष्यै पेरिस में 2024 में होने वाले ओलम्पिक में पदक जीतना है। क्या मध्य प्रदेश का खेल महकमा विश्वास के साथ बता सकता है कि उसका कोई एक भी खिलाड़ी टोक्यो ओलम्पिक में प्रदेश की नुमाइंदगी करेगा। मुझे यह कहने में जरा भी गुरेज नहीं कि मध्य प्रदेश का खेल सिस्टम खिलाड़ी हितैषी नहीं बल्कि ठकुर सुहाती पसंद है। प्रदेश सरकार प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को प्रोत्साहन देने की बजाय देश के उन खिलाड़ियों पर धनवर्षा कर रही है, जिनका मध्य प्रदेश से दूर-दूर का वास्ता नहीं है।
राष्ट्रीय खेलों में खेल एवं युवा कल्याण विभाग के चापलूस खेलनहार मुख्यमंत्री और खेल मंत्री को जहां खुश करने के लिए अन्य प्रदेशों के खिलाड़ियों से काम चलाते हैं वहीं भोले शिवराज और यशोधरा राजे सिंधिया एकेडमियों तथा खेल अधोसंरचना पर इतराते हैं। मध्य प्रदेश में खेलों के नाम पर क्या चल रहा है इसके लिए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को अपना तीसरा नेत्र खोलना चाहिए तो खेल मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया को भी जमीनी हकीकत से रूबरू होना होगा। मध्य प्रदेश का मीडिया प्रदेश के खेलप्रेमियों को वही सब्जबाग दिखाता है जोकि खेल एवं युवा कल्याण विभाग के चापलूस अधिकारी चाहते हैं। सच तो यह है कि हम पड़ोसियों के बेटों पर बधाई गीत गाने के आदी हो चुके हैं।