” सिंधिया बनाम सिंधिया जंग है ये तो……” * कोलारस विधानसभा उप चुनाव*

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तो ये सिंधिया बनाम सिंधिया जंग है !
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प्रदेश की भाजपा सरकार परेशान है.कल तक मुंगावली और कोलारस विधानसभा उपचुनाव में जो जंग सिंधिया बनाम चौहान थी अब अचानक सिंधिया बनाम सिंधिया हो गयी है .सामंतवाद को कोसने वाले मुख्यमंत्री और उनके मंत्रिमंडल के सदस्य अब सविनय अवस्था में सामंतवाद के आगे सर झुकाये खड़े नजर आने लगे हैं .दोनों उपचुनावों की कमान हारकर भाजपा को “श्रीमंत “के हाथों में सौंपना पड़ी है .
मै पिछले तीन दशक से मौके-बेमौके कहता आ रहा हूँ की प्रदेश की सियासत में “सामंतवाद ‘कोई मुद्दा है ही नहीं ,न कांग्रेस के लिए सामंतवाद मुद्दा है और न भाजपा के लिए.दोनों पार्टियों के भीतर जब-तब सामंतवाद के खिलाफ चहकने वाले लोग शगुन के लिए सामंतवाद का विरोध करते हैं लेकिन उन्हें अंतत “कोर्निश’ सिंधिया के सामने ही बजाना पड़ती है .ये १९५७ से हो रहा है.राजमाता विजयाराजे सिंधिया,माधवराव सिंधिया और अब ज्योतिरादतीय सिंधिया कांग्रेस के लिए जब भी शुभ हुए कांग्रेस ने इन सबको अपने कंधो पर उठाया .जनसंघ,जनता दल और भाजपा में भी कांग्रेस की तरह राजमाता विजयाराजे सिंधिया,बसुंधरा राजे और श्रीअमंत यशोधरा राजे सिंधिया को अपने कंधे पर बैठाया हुआ है .प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी से लेकर राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ तक के लिए सामंतवाद अस्पृश्य नहीं है ,बल्कि सभी इस वाद के सहारे ही जहाँ-तहाँ अपने गढ़ बचाये हए हैं.सिंधिया के लावा भी अनेक पूर्व राजघराने किसी न किसी दल के साथ हैं ,केवल जनता को भ्रमित करने के लिए सामंतवाद का इस्तेमाल किया जाता है .
मध्यप्रदेश के आने वाले दिनों में होने वाले दो उपचुनावों में आरम्भ में सामंतवाद के साथ ही सिंधिया गहराने को गरियाने के लिए भाजपा का एक विशेष हरावल दस्ता काम कर रहा था और इसी से क्षुब्ध होकर प्रदेश की मंत्री श्रीमंत यशोधरा राजे सिंधिया कोपभवन में चलीं गयीं थीं .पांवों के नीचे से जमीन खिसकती देख पूरी भाजपा को न केवल यशोधराराजे सिंधिया के सामने नतमस्तक होना पड़ा बल्कि चौहान को हटाकर उन्हें मोर्चे पर खड़ा करना पड़ा और अब पूरी पार्टी उनके पीछे खड़ी है .
कांटे से कांटा निकलने का चलन पुराना है,सभी दल इसका इस्तेमाल करते हैं लेकिन भाजपा इसमें सिद्धहस्त है .इसके दो ताजा नमूने हमारे सामने हैं. भाजपा ने बागी हो चुके पूर्व केंद्रीय मंत्री श्री यशवंत सिन्हा को दबाने के लिए उनके बेटे केंद्रीय मंत्री जयंत सिन्हा का इस्तेमाल किया लेकिन कामयाबी नहीं मिली,इसी तरह अब मध्य्प्रदेश में पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के खिलाफ येन-केन प्रदेश की मंत्री और ज्योतिरादित्य सिंधिया की सगी बुआ श्रीमंत यशोधरा राजे सिंधिया का इस्तेमाल किया जा रहा है,अब देखना ये होगा की कांटे से काँटा निकलता है या इस कोशिश में टूट जाता है. टूटता बाहर वाला कांटा ही,भीतर वाले कांटे के चारों और तो सुरक्षा कुछ होता है .आपको मेरे तजुर्बे पर शक हो तो आप इसे नकार सकते हैं अन्यथा सच तो सच है ही .
@ राकेश अचल

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार है)