सावधान मामा जी गुस्से में हैं …. @ राकेश अचल

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सावधान मामा जी गुस्से में हैं
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मध्यप्रदेश वालो सावधान !,सावधान इसलिए क्योंकि मामा जी अब गुस्से में है. सरदारपुर के एक रोड शो में उन्होंने अपने एक सुरक्षाकर्मी को झापड़ रसीद कर दिया,धक्का दिया सो बोनस में .हमारा तजुर्बा है की हमारे मामाजी को वैसे गुस्सा आता नहीं है .बीते बारह साल में उन्हें कभी किसी ने आग-बबूला होते नहीं देखा,हाथ-पांव चलने का तो सवाल ही नहीं,वे हैं ही डेढ़ पसली के,लेकिन अब तो वे कमाल ही कर बैठे .
मामा का झापड़ खाकर सुरक्षाकर्मी को समझ आ गया होगा की मामा केवल कागज का ही शेर नहीं है असली शेर है और वक्त आने पर किसी को भी सबक सिखा सकता है.मामा लगता है आजकल पतंजलि का जोशवर्द्धक ले रहे हैं,यदि ऐसा न होता तो क्या मामा किसी सुरक्षाकर्मी पर हाथ उठाते ?मामा जन्मना गाय हैं,उनसे हिंसा होगी ये कल्पना करना ही बेकार है .वे तो आनंद के पक्षधर हैं.इसीलिए उन्होंने प्रदेश में आनंद विभाग खोला है .बाकायदा आनंद बांटने के लिए सरकारी और असरकारी लोगों को प्रशिक्षण दिलाया है .मामा की कोशिशों से सूबे में समाज का हर तबका आनंदमय है .
लगता है की सरदारपुर में स्वर्गीय जमना बुआ की आत्मा ने मामा को अपनी चपेट में ले लिया .मामा आसन्न विधानसभा चुनावों को लेकर थोड़े तनाव में जरूर हैं किन्तु इतने भी नहीं की अपने ही सुरक्षाकर्मी को धुन दें .या तो मामा को अब किसी सुरक्षा की दरकार नहीं है या फिर वे सुरक्षा कुछ को उतारकर आम आदमी की तरह सियासत करना चाहते हैं .मामा खुद सिंह हैं अब तो उनके शौक भी मैदान में विचरण योग्य हो गए हैं ,ऐसे में सुरक्षाकर्मी किस काम के ?
मामा के तेवर देखकर कांग्रेस वालों से ज्यादा भाजपा वाले परेशान हैं, भाजपा वाले सोचते हैं की यदि मामा खुद फौजदारी करने पर आमादा हो गए तो आम कार्यकर्ता के पास चुनावों में करने के लिए क्या रह जाएगा ?मामा के सामने ज्योति बा को लाने की अफवाहें हैं,शायद इन्हीं अफवाहों से तंग आकर मामा ने ये ‘ट्रेलर ‘ दिखाया है .मामा फील न देखते हैं और न दिखते हैं,वे ट्रेलर से ही काम चलाना चाहते हैं. उन्होंने पहले ही कह दिया है की ‘पद्मावत’के मुरीद अगर सचमुच सिनेमा देखना चाहते हैं तो वहां जाकर देखें जहाँ भाजपा की सरकार न हो .
हमारा मामा से कोई सीधा संबंध नहीं है किन्तु हम मामा को लेकर परेशान जरूर हैं, हमारी मंशा है की कम से कम एकबार मामा के रक्तचाप की जांच होना चाहिए,रक्तचाप अक्सर कम,बढ़ होने वाली चीज है .अगर कहीं गलती से बढ़ा हो तो उसे घटने के उपाय शुरू किये जाएँ और अगर अस्थायी रूप से कोई समस्या हो तो उसका निवारण किया जाये .मामा की तरह एक बार हमने सूबे के एक और महान मुख्यमंत्री प्रकाशचंद्र सेठी को हाथ चलते देखा था ,,दिग्गी राजा तो इस मामले में दक्ष राजनेता हैं.वे जुबान और हाथ-पांव समान रूप से चलाते हैं .
हमारा सुझाव ये भी है की अब मामा की सुरक्षा के लिए तैनात किये जाने वाले सुरक्षाकर्मियों को अपने -अपने कपोलों का बीमा करा लेना चाहिए,पता नहीं कब मामा का मन चनकट्याने का हो जाये ! .मै शुक्रगुजार हूँ उस सुरक्षाकर्मी का जो दरियादिल है और उसने मामा का थप्पड़ हँसते-हँसते खा लिया,कोई प्रतिक्रिया नहीं की,कांग्रेस के उकसाने के बावजूद किसी थाने-कचहरी नहीं गया .मुमकिन है की इस सहनशीलता के बदले में उस गरीब को आने वाले विधानसभा चुनाव में किसी विधानसभा सीट से भाजपा का प्रत्याशी बना दिया जाये. हमारे सूबे की विधानसभा में सिपाही चुने जाते रहे हैं..
कुल मिला कर गल ये है की मामा को हालफिलहाल गुस्सा आने लगा है .ये इस बात का प्रमाण है की वे पुरषार्थी हैं ,उनका लोहा अभी ठंडा नहीं पड़ा है,वे विधानसभा चुनाव में किसी भी चुनौती का जैसे कहिये वैसे ,जिससे कहिये उससे ,सामना करने के लिए कमर कस कर तैयार हैं .
हमारी शुभकामनाएं,आपको भी देना ही चाहिए