क्रिकेट में मिताली सेना ने भी बनाई पहचान विश्व कप में खेला फाइनल

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श्रीप्रकाश शुक्ला
साल 2017 में टीम इंडिया ने अनेक नए कीर्तिमान रचे। साल 2015 के बाद से तो भारतीय शूरवीर घरेलू मैदान पर एक भी सीरीज़ नहीं हारे। टीम इंडिया ने पिछले 25 महीनों में 16 सीरीज़ जीती हैं लेकिन साल 2017 में एक ऐसा कारनामा भी हुआ कि पूरा देश उसके आगे नतमस्तक हो गया। जी हां और ये कारनामा पुरूषों की टीम इंडिया ने नहीं बल्कि महिला टीम इंडिया ने कर दिखाया. इस साल 23 जुलाई से देश की महिला क्रिकेट टीम को भी एक नई पहचान मिल गई।
भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने साल 2005 के बाद दूसरी बार महिला क्रिकेट विश्वकप के फाइनल तक का सफर तय किया और क्रिकेट जगत के साथ-साथ क्रिकेट के करोड़ों फॉलोअर्स को भी ये बता दिया महिला टीम इंडिया अब किसी से भी कम नहीं है। आमतौर पर महिला क्रिकेट के मैचों का प्रसारण टेलीविजन पर नहीं किया जाता लेकिन इस बार महिला क्रिकेट विश्वकप का प्रसारण किया गया और इतना ही नहीं इसे रिकॉर्ड दर्शकों ने देखा भी।
गुमनामी के साथ कप्तान मिताली राज की अगुआई में इंग्लैंड पहुंची इस टीम के फाइनल तक पहुंचने की किसी को भी उम्मीद नहीं थी लेकिन 24 जून को मेजबान इंग्लैंड के खिलाफ डर्बी में अपने विश्वकप सफर का विजयी आगाज़ करते हुए टीम ने अपनी धमक सुना दी।
इंग्लैंड को हराने के बाद इस टीम ने टूर्नामेंट में न्यूजीलैंड, वेस्डइंडीज, ऑस्ट्रेलिया, पाकिस्तान और श्रीलंका जैसे टीमों को पछाड़ते हुए फाइनल का सफर तय किया. इसमें सबसे खास रही पाकिस्तान के खिलाफ जीत। महिला टीम की इस जीत को पुरूष टीम के बदले के रूप में भी देखा गया। जहां इसी साल चैम्पियंस ट्रॉफी फाइनल में पाकिस्तान ने भारत को धूल चटाई थी वहीं इंग्लैंड में भारतीय महिला टीम ने पाकिस्तान को हराकर उस हार का बदला चुकता कर लिया। भारतीय महिला टीम के इतिहास में 2005 के बाद दूसरा मौका था जब वह विश्व कप के फाइनल तक पहुंची। हालांकि एक सपना हकीकत बनने से महज़ नौ रनों से चूक गया जब विश्व कप के फाइनल मुकाबले में टीम को महज नौ रन से शिकस्त का सामना करना पड़ा लेकिन फाइनल में हार के बावजूद भारतीय लड़कियों ने विदेश में जाकर जैसा धुंआधार प्रदर्शन किया. वह अपने आप में एक विजय अभियान माना गया।
विश्वकप में इन लड़कियों ने दिखाया दम:
कप्तान मिताली राज:
महिला क्रिकेट की सचिन तेंदुलकर मानी जाने वाली कप्तान मिताली राज को शायद ही कोई क्रिकेट प्रेमी न पहचानता हो। वह इस साल विश्वकप में 409 रनों के साथ दूसरी सबसे अधिक रन बनाने वाली बल्लेबाज़ रहीं. उन्होंने इस साल विश्वकप में एक शतक और तीन पचासे जमाए। पूरे टूर्नामेंट में हर मौके पर उन्होंने टीम के लिए अहम पारियां खेलीं. इसके अलावा उन्होंने अपनी कप्तानी कौशल से भी सबको प्रभावित किया और टीम को फाइनल तक पहुंचाया।
पूनम राउत:
28 वर्षीय हरफनमौला पूनम रावत इस विश्वकप में टीम इंडिया की सफल खिलाड़ियों में से एक कही जाएं तो गलत नहीं होगा. पूनम ने इस टूर्नामेंट में भारत के लिए बल्ले से टीम को दमदार शुरूआत दिलाई और कई अहम मौकों पर रन भी बनाए. उन्होंने इस टूर्नामेंट में एक शतक और दो पचासे लगाए। उन्होंने कुल 381 रन बनाए इसके अलावा गेंदबाज़ी में भी 11 अहम विकेट अपने नाम किए।
हरमनप्रीत कौर:
विश्वकप में 20 जुलाई के दिन हरमनप्रीत कौर नाम की एक सूनामी ने ऑस्ट्रेलियाई किले को ढहा दिया. जी हां, हरमनप्रीत ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ विश्वकप सेमीफाइनल में 171 रनों की नाबाद पारी खेलकर सबको चौंका दिया. इस पारी में उन्होंने 20 चौके और 7 छक्के लगाकर टीम इंडिया की जीत की इबारत लिखी. इस टूर्नामेंट में खेले 9 मुकाबलो में हरमनप्रीत ने 359 रन बनाए।
दीप्ति शर्मा:
जिस खिलाड़ी ने बैक-स्टेज रहते हुए भी टीम इंडिया की जीत की नींव रखी वह कोई और नहीं बल्कि दीप्ति शर्मा रहीं. दीप्ति ने इस विश्वकप में भारत के लिए बल्ले और गेंद दोनों से बेहतरन खेल दिखाया. उन्होंने इस विश्वकप में 2 अर्धशतकों के साथ 31 के औसत से 216 रन बनाए वहीं गेंदबाज़ी में उन्होंने विरोधी बल्लेबाज़ों को अपनी फिरकी पर नाचने के लिए मजबूर कर दिया. उन्होंने गेंदबाज़ी में 12 विकेट चटकाए और वह विश्वकप में भारत की तरफ से सबसे अधिक विकेट लेने वाली गेंदबाज़ रहीं।
झूलन गोस्वामी
अनुभवी गेंदबाज झूलन गोस्वामी मौजूदा आईसीसी रैंकिंग में नम्बर दो पायदान पर हैं। कुछ ऐसा प्रदर्शन और उनके अनुभव का फायदा टीम इंडिया को विश्वकप में हुआ। झूलन ने अपनी गेंदों के आगे विरोधी बल्लेबाज़ों को खूब नचाया. उन्होंने पारी की शुरूआत में विकेट चटकाकर विरोधी टीम पर दबाव बनाने में अहम योगदान दिया। अकसर उनके आगे इस टूर्नामेंट में विरोधी बल्लेबाज़ी धीमे रन-रेट से बल्लेबाज़ी करते दिखी। उन्होंने टूर्नामेंट में 10 विकेट चटकाए। भारतीय महिला क्रिकेट टीम के विश्वकप में ऐसे प्रदर्शन को देख देशभर ने उन्हें पलकों पर बिठाया गया। ऐसे प्रदर्शन और फैंस के प्यार के बाद इस पूरी टीम को एक नई पहचान मिली जिसकी महिला टीम को आगे भी ज़रूरत है।