SBI का प्लान इन 12 डिफॉल्टर्स कंपनियों पर होगी करवाई

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डिफॉल्टर कंपनियों के लिए बढ़ी मुश्किलें वीडियोकॉन इंडस्ट्रीज सहित करीब 12 कंपनियों पर स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) दिवालिया कानून के तहत करने जा रहा है कार्यवाही. रिजर्व बैंक ने इन कंपनियों की लोन रिस्ट्रक्चरिंग के लिए दिसंबर की डेडलाइन तय की थी, लेकिन इस समयसीमा ऐसा नहीं हो सका.

इन कंपनियों को NCLT को रेफर करेगा RBI
ऐसे में एसबीआई इन कंपनियों को नेशनल कंपनी लॉ ट्राइब्यूनल (एनसीएलटी) में ले जाने की तैयारी कर रहा है. वह वीडियोकॉन इंडस्ट्रीज, वीजा स्टील, मोनेट पावर, उत्तम स्टील, एस्सार प्रोजेक्ट्स, वीडियोकॉन टेलीकॉम, जायसवाल नेको और जय बालाजी को एनसीएसटी को रेफर करने की शुरुआत करेगा. क्रिसमस और न्यू ईयर की छुट्टियों के बाद ट्राइब्यूनल 2 जनवरी से खुलेगा.

अगस्त में 28 डिफॉल्टिंग कंपनी की दूसरी लिस्ट जारी कर चुका है RBI

RBI अगस्त में 28 डिफॉल्टिंग कंपनी की दूसरी लिस्ट जारी कर चुका है. आरबीआई ने कहा था कि अगर 13 दिसंबर तक कोई हल नहीं निकलता है तो बैंक 31 दिसंबर तक इन्हें एनसीएलटी में ले जाएं. इससे पहले आरबीआई ने जून में 12 बड़ी डिफॉल्टिंग कंपनियों के खिलाफ दिवालिया कानून के तहत सीधे कार्यवाही का आदेश दिया था. इस लिस्ट में एस्सार स्टील, भूषण स्टील, एबीजी शिपयार्ड और लैंको जैसी कंपनियों के नाम शामिल थे.

दूसरी लिस्ट में आई कंपनियों से बैंकों को वसूलने हैं 2 लाख करोड़
आरबीआई की दूसरी लिस्ट में जिन कंपनियों के नाम हैं, उनसे बैंकों को 2 लाख करोड़ रुपये वसूलने हैं. कंपनियों को एनसीएलटी में रेफर करने का मतलब है कि इनके लिए बैंकों को प्रोविजनिंग बढ़ानी पड़ेगी, जिसका उनके मुनाफे पर बुरा असर पड़ेगा. आरबीआई ने एनसीएलटी में भेजे जाने वाले मामलों के लिए बैंकों को 50 पर्सेंट प्रोविजनिंग करने का निर्देश दिया है.

बैंकों को करनी होगी 100 पर्सेंट प्रोविजनिंग
वहीं, अगर इन कंपनियों का लिक्विडेशन होता है तो उसके लिए बैंकों को 100 पर्सेंट प्रोविजनिंग करनी पड़ेगी. आरबीआई ने बैंकों को प्रोविजनिंग के लिए मार्च 2018 तक का समय दिया है. दूसरी लिस्ट में जेपी एसोसिएट्स, सोमा एंटरप्राइजेज और एनार्क एल्युमीनियम जैसी कुछ कंपनियों को छोड़कर अन्य सभी कंपनियों को बैंकरप्सी कोर्ट भेजा जाएगा. इन तीनों कंपनियों की लोन रिस्ट्रक्चरिंग पूरी हो चुकी है. इनमें सबसे अधिक लोन वीडियोकॉन इंडस्ट्रीज पर है. वह 47,000 करोड़ रुपये के लोन पर डिफॉल्ट कर चुकी है.