“खतरे में शिवराज….”! अब भीड़ तक नही जुटा पा रहा शिवराज का डमरू….! सरकारी मशीनरी की दम पर अधिग्रहित बसों में प्रदेश भर से जबरन ढोकर लाये जा रहे है लोग….! देखिये,सरकारी फरमान….

1948

पूरे प्रदेश से बसों का अधिग्रहण करने के बावजूद मुख्यमंत्री की सभा सफल न होना भाजपा के खिलाफ असंतोष का  परिचायक है-

मुंगावली विधानसभा के पिपरई ग्राम पंचायत में आयोजित मुख्यमंत्री की सभा के लिए सत्त्ता का दुयपयोग करके जिस प्रकार से पूरे मध्य प्रदेश से सभी विभागों के अधिकारियों एवं कर्मचारियों की ड्यूटी भीड़ को लाने एवं स्वयं को पिपरई में पहुचने के लिए आदेशित किया गया है एवं विदिशा, गुना, दतिया, सागर, भोपाल, रायसेन, शिवपुरी, ग्वालियर, मुरैना, भिंड, श्योपुर से बसों का अधिग्रहण करने का आदेश आरटीओ द्वारा निकाला गया है वो इस बात का परिचायक है कि मुंगावली की जनता भाजपा को नकार चुकी है इसलिए प्रदेश के विभिन्न ज़िलों से सरकारी मुलाज़िमों पर सरकारी आदेश लादकर जबरदसती भीड़ लाने का दबाव बनाया जा रहा है।

ज्ञात हो कि विगत 17 दिसंबर को मुंगावली के पिपरई ग्राम पंचायत में सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया की किसान जन आक्रोश रैली हुई थी जिसमे स्वस्फूर्त भावना से 50 हज़ार से अधिक किसान एवं आमजन शामिल हुए थे इस रैली के बाद ही 20 दिसंबर को पिपरई में आयोजित होने वाली मुख्यमंत्री की सभा को भाजपा को निरस्त करनी पड़ी।

इसके बावजूद भी पिपरई में मुख्यमंत्री की सभा मे 10 हज़ार से अधिक लोग नही आये, इन 10 हज़ार लोगों में से भी 6 हज़ार तो प्रदेश के विभिन्न हिस्सो से आये हुए शासकीय कर्मचारी हैं जिसमे आगवांवड़ी कार्यकर्ता, आशा कार्यकर्ता, शिक्षाकर्मी, पटवारी, पंचायत सचिव आदि शासकीय कर्मी शामिल हैं।

भाजपा को सांसद सिंधिया की रैली का रिकार्ड तोड़ने के लिए अब प्रदेश ही नही प्रदेश के बाहर से भी भीड़ लाने का प्रबंध करना पड़ेगा।

आज प्रश्न भीड़ का नही बल्कि मूल प्रश्न ये है कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की सभाओं में लोग आना पसंद क्यों नही कर रहे हैं? एक एक सभा पर करोड़ों रुपये पानी की तरह बहाने के बावजूद भी हज़ारों लोगों का न आना इस बात का स्पष्ट परिचायक है कि मुख्यमंत्री की लोकप्रियता खत्म हो चुकी है, लोग झूठी घोषणाओं से ऊब ही नही चुके हैं बल्कि अब विरोध करने के लिए सड़कों पर उतर रहे हैं,  

मुंगावली एव कोलारस में मतदान के पहले ही वहां की जनता ने मुख्यमंत्री एवं भाजपा को  हार का स्पष्ट संदेश दे दिया है।