” खजुराहो अंतर्राष्ट्रीय फ़िल्म महोत्सव-2017 ” – देहात की देहरी पर सिनेमा की दस्तक़… …

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@ राकेश पाठक @

“खजुराहो अंतर्राष्ट्रीय फ़िल्म महोत्सव” सिनेमा को गांव देहात की देहरी पर ले आने में कामयाब रहा। ये अपनी तरह का एकमात्र और अनूठा फ़िल्म महोत्सव है जो गांव ,देहात तक फ़िल्म और फ़िल्म वालों को लेकर आता है।सिनेमा को अपनी ज़मीन से जोड़ने की ये कवायद अब दुनिया भर में चर्चा का सबब बन चुकी है।

सात दिन का ये महोत्सव विख्यात फ़िल्मकार शेखर कपूर को “भारत गौरव सम्मान” देकर शुरू हुआ और NSD के निदेशक वामन केंद्रे और अभिनेता जैकी श्रॉफ को विशेष सम्मान के साथ ऊंचाई पर पहुंचा।हरियाणा के राज्यपाल प्रो कप्तान सिंह सोलंकी Kaptan Singh Solanki जी समापन समारोह के मुख्य अतिथि रहे।
अभिनेता,निर्देशक राजा बुंदेला Raja Bundela का जज़्बा ही है कि बुंदेलखंड की धरती पर सिनेमा के सितारे उतार लाये। जिस खजुराहो में नामलेवा भी सिनेमाघर नहीं हैं वहां पांच “टपरा टाकीज़” बनाकर हफ्ते भर पचासों फिल्में निःशुल्क दिखाईं गईं।

तमाम आंचलिक फिल्में न केवल प्रदर्शित हुयीं बल्कि नवोदित फिल्मकारों को दिग्गजों के हाथों सम्मान भी मिला। बाकायदा कार्यशाला लगा कर तीन युवा चयनित किये गए जो अब अनुपम खेर, रमेश सिप्पी और सुभाष घई की एकेडमी में ट्रेनिंग लेंगे।

महानगरों की चकाचौंध के फ़िल्म महोत्सवों से अलग असली हिंदुस्तान के लोगों तक सिनेमा की ये दस्तक अब दुनिया भर में सुनी जा रही है। इस महोत्सव का यह सिर्फ तीसरा साल है और इसकी धाक बॉलीवुड के गलियारों में जम चुकी है। यही साख तो है जो मनमोहन शेट्टी, रमेश सिप्पी, गोविंद निहलानी से लेकर जैकी श्रॉफ, प्रेम चौपड़ा, मीता वशिष्ठ,मीरा चौपड़ा और फ्रांस की मारीन बोर्गो तक को खजुराहो तक खींच लाई।

नोट: सातों दिन नेपथ्य से जो आवाज़ गूंजती
रही वो वरिष्ठ पत्रकार डॉ राकेश पाठक की थी।