आलेख ! या अल्लाह जीतें तो मोदी जी ही …….- राकेश अचल

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या अल्लाह जीतें तो मोदी जी ही
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आप यकीन मानिये कि मै दिल से चाहता हूँ कि हिमाचल और गुजरात में भाजपा कतई न जीते लेकिन प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जरूर जीतें ,यदि वे न जीते तो देश में लोकतंत्र हार जाएगा,उसे काठ मार जाएगा ,क्योंकि एक सूबा जीतने के लिए एक प्रधामंत्री के रूप में जितना कठोर श्रम श्री नरेंद्र मोदी जी ने किया है अतीत में किसी प्रधानमंत्री ने नहीं किया .
‘एक्जिट पोल’को मै ‘एक्जेक्ट पोल’नहीं मानता.वे किसे हराएँ या किसे जिताएं इससे मेरे मानस पर कोई फर्क नहीं पड़ता.जनमानस पर भी शायद इनका कोई बहुत असर नहीं.होता.मतदाता झूठ के झांसे में आ सकता है लेकिन सच कभी नहीं बोल सकता फिर भी अंदाजा लगाने वाले तो अंदाजा लगाते हैं,वक्त की नब्ज टटोलते हैं .’एक्जिट पोल’कह रहे हैं कि हिमाचल और गुजरात में भाजपा ही आ रही है.भाजपा के लिए ये अच्छी खबर है,कांग्रेस के लिए खराब ,लेकिन बड़ी बात ये है कि ये खबर बनाने में सियासत को कितने नीचे जाना पड़ा .हिमाचल की छोड़िये बात गुजरात की है जहां आम चुनाव से भी ज्यादा गलाकाट द्वन्द हुआ .जुबानें कैंचियों की तरह नहीं तलवारों की तरह चलीं .मैदान में खड़े लोग तो इस जंग में जख्मी हुए ही दर्शकों को भी आघात लगा
भाजपा इन दो नए सूबों को जीतकर संतोष महसूस कर सकती है कि नोटबंदी और जीएसटी की चाबुकें खाने के बाद भी जनता ने उफ़ तक नहीं की लेकिन हकीकत ये है कि ये चुनाव साम,दाम,दंड और भेद के इस्तेमाल की तमाम सीमाओं को तोड़कर लड़े गए .कांग्रेस के नायकों को भाजपा के एकमेव नेता के मुकाबले मंदिर -मंदिर माथा टेकना पड़ा .लगा जैसे दोनों को सिवाय मंदिर में माथा टेकने के कुछ और आता ही नहीं .चुनाव में विकास के बजाय मान-अपमान का मुद्दा छाया रहा .लोकतंत्र में अब यही सब आगे भी होगा शायद !
‘एक्जीटपोल’बताने वालों ने पहले से संदिग्ध ईवीएम मशीनों में झाँक कर बता दिया है कि गुजरात में सत्तारूढ़ भाजपा को 117 सीटें मिल रही हैं .आप जानते हैं कि गुजरात में भाजपा बीते २२ साल से सत्ता में है .कांग्रेस के लिए 22 साल बाद सत्ता में वापसी का ये एक अवसर भी कहा जा सकता है .पार्टी के नए अध्यक्ष राहुल गांधी ने अध्यक्ष पद पर निर्वाचित होने के पहले से ही गुजरात का मोर्चा खुद सम्हाल लिया था और वे सत्तारूढ़ भाजपा को चहकने में कामयाब भी रहे . गुजरात में 182 विधानसभा सीटें हैं और बहुमत का जादुई आंकड़ा 92 है.जो सबके लिए महत्वपूर्ण है .
हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस की वापसी के आसार पहले से कम थे ,हिमाचल कि 68 विधानसभा सीटों के लिए करीब 74 फीसदी वोटिंग दर्ज की गई. राज्य में कांग्रेस के वीरभद्र सिंह के सामने अपनी कुर्सी को बचाने की चुनौती है तो वहीं बीजेपी के प्रेम कुमार धूमल एक बार फिर हिमाचल की सत्ता पर कब्जा जमाने की कोशिश करेंगे.वर्तमान में राज्य की 68 सदस्यीय विधानसभा में कांग्रेस और बीजेपी के क्रमश: 35 और 28 विधायकों के साथ चार निर्दलीय हैं और एक सीट खाली है. चुनावों में 180 से ज्यादा निर्दलीय और कांग्रेस के एक दर्जन से ज्यादा बागी मुकाबले में हैं. आपको बता दें कि हिमाचल में सरकार बनाने के लिए 35 सीटों की आवश्यकता है.जो भाजपा के लिए बिलकुल कठिन लक्ष्य नहीं है .
गुजरात की हवा पछुवा हवा की तरह होना चाहिए,यदि ये हवा आम चुनाव तक कायम रही तो भाजपा के लिए अगला आम चुनाव आसान हो सकता है अन्यथा भाजपा गुजरात से पहले बिहार,दिल्ली और पंजाब में हार से मिले अपने जख्मों को सहलाने के अलावा और कुछ कर नहीं पायेगी .गुजरात की जीत से भाजपा के वे नेता दोबारा सांस लेने लगेंगे जो फिलवक्त ‘वेंटिलेटर’पर है .मेरी शुभकामनाओं के लिए भाजपा और कांग्रेस को चार दिन और प्रतीक्षा करना पड़ेगी .
@ राकेश अचल